वो आग सी इन होंठो पे रह कर हाँ प्यास मेरी बुझा रही हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
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निगाहें फेर ली घबरा के मैं ने वो तुम से ख़ूब-सूरत लग रही थी
Fahmi Badayuni
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मौत से मिलना है मुझ को पूछना है इक पता वो पता जो मौत भी देने में शर्मा जाएगी
"Nadeem khan' Kaavish"
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है जन्नत में सारी ही नेमत ख़ुदा की मुझे भी बताओ ये जन्नत कहाँ है
"Nadeem khan' Kaavish"
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यार अब तो काफ़ी ज़्यादा सज गई हो फिर भी तुम को हम पुरानी लिख रहे हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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मिला था जिस बग़ीचे में वो अब शमशान लगता है मुहब्बत ने ये कैसे दिन दिखाए हैं मुहब्बत में
"Nadeem khan' Kaavish"
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मेरे वतन को इन सियासी लोगों ने ही खा लिया ख़बर में अब ख़बर कहाँ, वही दो-चार रहते हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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