मेरे वतन को इन सियासी लोगों ने ही खा लिया ख़बर में अब ख़बर कहाँ, वही दो-चार रहते हैं
Related Sher
इतना संगीन पाप कौन करे मेरे दुख पर विलाप कौन करे चेतना मर चुकी है लोगों की पाप पर पश्चाताप कौन करे
Azhar Iqbal
109 likes
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
Allama Iqbal
97 likes
प्यास अगर मेरी बुझा दे तो मैं जानू वरना तू समुंदर है तो होगा मेरे किस काम का है
Rahat Indori
109 likes
कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी
Javed Akhtar
96 likes
ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में
Fahmi Badayuni
122 likes
More from "Nadeem khan' Kaavish"
मिला था जिस बग़ीचे में वो अब शमशान लगता है मुहब्बत ने ये कैसे दिन दिखाए हैं मुहब्बत में
"Nadeem khan' Kaavish"
1 likes
है जन्नत में सारी ही नेमत ख़ुदा की मुझे भी बताओ ये जन्नत कहाँ है
"Nadeem khan' Kaavish"
1 likes
यहाँ अब कौन दिल का कायल है ,बता हाँ कुछ लिबास होते तो कुछ बात थी
"Nadeem khan' Kaavish"
2 likes
नज़र में हुस्न लाखों थे हमें पर वो ही प्यारा था
"Nadeem khan' Kaavish"
2 likes
नया कोई आशिक़ बनाया गया ये प्यारा सा रिश्ता जलाया गया
"Nadeem khan' Kaavish"
2 likes
Similar Writers
Our suggestions based on "Nadeem khan' Kaavish".
Similar Moods
More moods that pair well with "Nadeem khan' Kaavish"'s sher.







