वो इक गली जिसे छोड़ हुए मुझे बरसों न जाने क्यूँ मेरे ख़्वाबों में रोज़ आती है
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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
Bashir Badr
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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यूँँ तेरी याद मुझे कब नहीं आती है मगर ऐसे मौसम में तेरी याद बहुत आती है
Dipendra Singh 'Raaz'
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वो अपने ज़ेहन में रखती थी पहले मुझ को फिर वो मेरा नाम बनाती थी अपने हाथों पे
Dipendra Singh 'Raaz'
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सैलाब ही ला कर के ये छोड़ेंगे एक दिन पत्थर लिए बैठे हैं जो दरिया के सामने
Dipendra Singh 'Raaz'
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सितारा ही तो कहती थी मुझे तुम दुआएंँ माँग लो टूटा हुआ हूँ
Dipendra Singh 'Raaz'
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रोकने से कभी नहीं रुकती तेरी यादें भी सांँस जैसी है
Dipendra Singh 'Raaz'
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