सैलाब ही ला कर के ये छोड़ेंगे एक दिन पत्थर लिए बैठे हैं जो दरिया के सामने
Related Sher
एक दिन की ख़ुराक है मेरी आप के हैं जो पूरे साल के दुख
Varun Anand
92 likes
हाल मीठे फलों का मत पूछो रात दिन चाकूओं में रहते हैं
Fahmi Badayuni
102 likes
आज देखा है तुझ को देर के बा'द आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
Nasir Kazmi
102 likes
हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
157 likes
कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो
Dushyant Kumar
91 likes
More from Dipendra Singh 'Raaz'
यूँँ तेरी याद मुझे कब नहीं आती है मगर ऐसे मौसम में तेरी याद बहुत आती है
Dipendra Singh 'Raaz'
0 likes
वो सदा जो कान तक पहुंँची नहीं शहर भर में ढूंँढते हैं हम उसे
Dipendra Singh 'Raaz'
0 likes
सुनहरे ख़्वाबों से जिस मकाँ को सजाया था हम ने मिल के बरसों हमारे ख़्वाबों के उस मकाँ को लगा दी है आग ख़ुद ही उस ने
Dipendra Singh 'Raaz'
0 likes
ज़ख़्म ऐसा दो मुझे अब इश्क़ में, के नील ही पड़ जाए मेरे दिल के अंदर
Dipendra Singh 'Raaz'
0 likes
तुम्हारे इश्क़ से मुझ को अता हुए थे जो तमाम ज़ख़्म वो मैं ने सदा हरे रक्खे
Dipendra Singh 'Raaz'
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Dipendra Singh 'Raaz'.
Similar Moods
More moods that pair well with Dipendra Singh 'Raaz''s sher.







