वो सदा जो कान तक पहुंँची नहीं शहर भर में ढूंँढते हैं हम उसे
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम न टूटो कभी भी इस लिए पत्थर है कहा मैं तुम्हें फूल जो कहता तो बिखर जाती तुम
Dipendra Singh 'Raaz'
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ज़ख़्म ऐसा दो मुझे अब इश्क़ में, के नील ही पड़ जाए मेरे दिल के अंदर
Dipendra Singh 'Raaz'
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सीने से मांँ लगाए ही रखती है रात भर रोता हुआ जो नींद से उठ जाऊँ मैं कभी
Dipendra Singh 'Raaz'
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ज़िंदगी मान बैठते हैं जिसे छोड़ जाता है क्यूँ वो ही तन्हा
Dipendra Singh 'Raaz'
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सितारा ही तो कहती थी मुझे तुम दुआएंँ माँग लो टूटा हुआ हूँ
Dipendra Singh 'Raaz'
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