वो पल उल्फ़त के वो दौर वफ़ा का तुम चाहो तो झुठला भी सकते हो
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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ठीक है मैं दिल लगा लेती किसी से इक दफ़ा फिर क्या मगर इस बार सच्चा इश्क़ होगा उस को मुझ से
Bhoomi Srivastava
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मेरी सच्चाई अब तो राएगाँ ही है उसे कुछ वसवसों ने छीना है मुझ से
Bhoomi Srivastava
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मैं क्यूँ बोलूँ कि वो इक बे-वफ़ा है उसी का ज़ेहन ख़ुद बोलेगा इक दिन
Bhoomi Srivastava
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कभी नहीं क़ुबूल होगी ये दुआ मेरी मगर सितारे टूटते गए मैं उस को माँगती रही
Bhoomi Srivastava
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तुम को कितना ज़्यादा याद किया है मैं ने मिल कर देखो आँखें कितनी लाल हुई हैं
Bhoomi Srivastava
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