मेरी सच्चाई अब तो राएगाँ ही है उसे कुछ वसवसों ने छीना है मुझ से
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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ठीक है मैं दिल लगा लेती किसी से इक दफ़ा फिर क्या मगर इस बार सच्चा इश्क़ होगा उस को मुझ से
Bhoomi Srivastava
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थी मैं अच्छी कल तक तेरे ख़ातिर पर अब जो हूँ वो तेरा कर्मा हूँ
Bhoomi Srivastava
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मेरे होंठों पे उस के नाम का हर पल तराना है वो दीवाना समझता है वही केवल दिवाना है उसे मैं, मुझ को वो सारी कमी के साथ है मंज़ूर मुहब्बत के दयारों में यही अपना फ़साना है
Bhoomi Srivastava
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ज़रा सा ज़िक्र आ जाए कभी तुझ से बिछड़ने का तो ऐसा लगता है जैसे कलेजा मुँह को आया है
Bhoomi Srivastava
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मुहब्बत वो भी करता है मुहब्बत हम भी करते हैं मगर इक दूसरे को कहने से दोनों ही डरते हैं
Bhoomi Srivastava
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