वो मेरा आशियाँ यूँँ सजा के गया जल रही हर शमा' को बुझा के गया
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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निगाहें फेर ली घबरा के मैं ने वो तुम से ख़ूब-सूरत लग रही थी
Fahmi Badayuni
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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ऐ ज़माने मुझे यूँँ न बदनाम कर हो सके तो मुझे उन के ही नाम कर
Shivam Mishra
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शख़्स सब हम को अपने ही दिखते रहे बस तभी हम बिना दाम बिकते रहे
Shivam Mishra
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हाल पूछो अगर तो तन्हा हूँ है यही इक ख़याल आ जाओ
Shivam Mishra
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ख़ास कुछ भी नहीं अब मेरे पास है चीख़ने का ख़मोशी में एहसास है
Shivam Mishra
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जो था क़िस्मत में मेरी वो मिला मुझ को न शिकवा है किसी से नइँ गिला मुझ को
Shivam Mishra
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