या रब मिरी दु'आओं में इतना असर रहे फूलों भरा सदा मिरी बहना का घर रहे
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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लगता है कई रातों का जागा था मुसव्विर तस्वीर की आँखों से थकन झाँक रही है
Unknown
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कई जवाबों से अच्छी है ख़ामुशी मेरी न जाने कितने सवालों की आबरू रक्खे
Unknown
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न हों अश'आर में माअनी न सही ख़ुद कलामी का ज़रिया ही सही तुम न नवाज़ो शे'र को, न सुनाएंगे ये मेरा ज़ाती नज़रिया ही सही
Unknown
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टकरा गया वो मुझ से किताबें लिए हुए फिर मेरा दिल और उस की किताबें बिखर गईं
Unknown
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दुनिया में वही शख़्स है ताज़ीम के क़ाबिल जिस शख़्स ने हालात का रुख़ मोड़ दिया हो
Unknown
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