yaad-e-mazi 'azab hai ya-rab chhin le mujh se hafiza mera
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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याद-ए-माज़ी 'अज़ाब है या-रब छीन ले मुझ से हाफ़िज़ा मेरा
Akhtar Ansari
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मैं किसी से अपने दिल की बात कह सकता न था अब सुख़न की आड़ में क्या कुछ न कहना आ गया
Akhtar Ansari
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हाँ कभी ख़्वाब-ए-इश्क़ देखा था अब तक आँखों से ख़ूँ टपकता है
Akhtar Ansari
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रोए बग़ैर चारा न रोने की ताब है क्या चीज़ उफ़ ये कैफ़ियत-ए-इज़्तिराब है
Akhtar Ansari
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अपनी उजड़ी हुई दुनिया की कहानी हूँ मैं एक बिगड़ी हुई तस्वीर-ए-जवानी हूँ मैं
Akhtar Ansari
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