याद ग़ालिब ने किया है हम को अपने शहर में तो लाज़मी है हम सभी पर इल्म कुछ हासिल करेंगे
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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ज़िंदगी मुझ को तिरी अब तो ज़रूरत ही नहीं उस की तस्वीर ही जीने के लिए काफ़ी है
salman khan "samar"
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तिरे दर से यूँँ उठ कर मैं न जाऊँगा किसी और दर तिरे ही दर पे मरने की क़सम खाई है मैं ने तो
salman khan "samar"
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तारीख़ मुझे याद रखे या न रखे पर तारीख़ बदलने की हिमाकत मैं करूँँगा
salman khan "samar"
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वो हाथ पकड़ कर के 'समर' खींचना उस का इक शख़्स के हाथों में तिरी याद है सीकर
salman khan "samar"
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वो फिर मिलेंगे राह में बे-वक़्त बे-वजह हम को है इत्तिफ़ाक़ से उम्मीद आज भी
salman khan "samar"
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