यहाँ सब मंज़िलों की दौड़ में हैं नहीं मालूम कब तक दौड़ना है
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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उन्हें दिल तख़्त पे बैठा चुके हैं अँगूठी फिर भी वो लौटा चुके हैं सड़क अब गाँव तक तो आ चुकी है मगर इस गाँव से सब जा चुके हैं
Kush Pandey ' Saarang '
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तुझे अपना बनाने की न है कोई कभी ख़्वाहिश तुझे इक रोज़ छोड़ा भी तो जा सकता है जानेजां
Kush Pandey ' Saarang '
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भले तुम नेक दिल बन्दे हो साहब मगर हर शख़्स अच्छा ना कहेगा "वो हम को चाहकर भी मिल न पाया" कईयों दिल में ऐसा ग़म रहेगा
Kush Pandey ' Saarang '
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तितली को तो भौंरा ही ले जाएगा फूल बिचारा रोएगा तन्हाई में
Kush Pandey ' Saarang '
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हक़ीक़त में नहीं मिलना था तुझ को सो हम ख़्वाबों में तुझ को ला चुके हैं तुझे भाए नहीं ये ग़म रहेगा हसीनों को बहुत हम भा चुके हैं
Kush Pandey ' Saarang '
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