यहीं खड़े हैं जहाँ मिले थे इधर से कब हम उधर गए हैं
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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नूर-ए-ख़ुदा है हर इंसाँ में फिर किस को नाशाद करोगे
Nityanand Vajpayee
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मिलो जब भी कभी जाहिल से तो ख़ामोश रहिए आप मियाँ जाहिल को आलिम से अजब तकलीफ़ होती है
Nityanand Vajpayee
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रहे हो आप काँटों में महीनों तक मेरे दिलबर बस इक शब होने को सोचा था हम-बिस्तर चले आते
Nityanand Vajpayee
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वादों से मुकर जाना तो फ़ितरत है तुम्हारी कुछ और नया खेल दिखाओ तो बने बात
Nityanand Vajpayee
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झूठ जुमला है कि मर्दों को नहीं होता है दर्द हर बशर की रूह को ग़म सालता तो ख़ूब है दोस्ती कर ली हो जिसने रंज-ओ-ग़म की शाम से दर्द ही दुश्मन है उसका दर्द ही महबूब है
Nityanand Vajpayee
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