sherKuch Alfaaz

ये अलग बात है मैं इन दिनों बेचैन सा हूँ पर ये चाहत भी मेरी थी कि जुदा हो जाएँ

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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ

Ali Zaryoun

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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है

Faiz Ahmad Faiz

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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं

Rahat Indori

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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है

Abrar Kashif

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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी

Ankita Singh

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शिकस्त-ए-दिल है ग़म ऐसा कहीं लज़्ज़त नहीं आती मिले कितने भी ता'ने फिर मगर ज़िल्लत नहीं आती गुमाँ है हुस्न पे उस को चढ़ा हमपे ख़ुमार-ए-इश्क़ उसे उल्फ़त नहीं आती हमें ग़ैरत नहीं आती

Rehaan

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है क़ुबूल तुम को भरना सर-ए-आम बाहों में पर है ये शर्त फिर कभी तुम न मिलोगी आइने से

Rehaan

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ये मानो या न मानो तुम मगर सच है यही देखो बिना मेरे तुम्हारा नाम तक पूरा नहीं होता

Rehaan

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तू कौन है कि हम तुझे पहचानते नहीं है नाम क्या तेरा ये भी हम जानते नहीं लो कह दिया कभी जो तुझे सुनना हम सेे था कहना न अब तेरा कहा हम मानते नहीं

Rehaan

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नहीं था इश्क़ में फिर भी मैं क्या क्या लिख चुका अब तक अगर दिल टूट जाता तो मैं क्या क्या लिख रहा होता

Rehaan

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