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ये और बात है कि वो मिलते नहीं मगर किस ने कहा कि उन सेे मेरी दोस्ती नहीं

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तुम्हारे प्यार की ख़ुश्बू हमेशा साथ रहती है तुम्हारी याद के लश्कर कभी तन्हा नहीं करते

SALIM RAZA REWA

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तू कहे तो मैं खुरच डालूँ बदन को लेकिन तेरी ख़ुशबू मेरी साँसों से मिटाऊँ कैसे   तुझ सेे फ़ुर्सत ही नहीं मिलती मेरी जान मुझे तो ख़यालों में किसी और को लाऊँ कैसे

SALIM RAZA REWA

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वो जिसे चाहे अता कर दे ज़माने की ख़ुशी उस के ही हाथों में हैं सारे जहाँ की नेमतें

SALIM RAZA REWA

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फफोले पड़ चुके आँखों में ज़ौक़-ए-दीद बाक़ी है  बहुत है दूर तू मुझ सेे मगर उम्मीद बाक़ी है  मेरी जाँ लौट के आजा दिल-ए-बीमार की ख़ातिर सभी की हो गई है ईद मेरी ईद बाक़ी है

SALIM RAZA REWA

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शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है

SALIM RAZA REWA

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