ये दर्द भी वफ़ाओं में यूँँ ढो रहा हूँ मैं तेरे अलावे और का भी हो रहा हूँ मैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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यक़ीं किस तरह कोई उनपे करेगा वो खाते हैं झूठी क़सम देखते हैं नहीं जिस की ता'बीर कोई जहाँ में वही ख़्वाब हम ऐ सनम देखते हैं
Navneet krishna
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ग़म-ज़दा गीत गुनगुनाना है हाल-ए-दिल आप को सुनाना है
Navneet krishna
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उस ने बुलवाया मुझे जाना पड़ा बे-सबब ही मुझ को मुस्काना पड़ा
Navneet krishna
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तोड़ डाला नशा को तेरी याद ने होश में ऐसे मैं आज आता नहीं
Navneet krishna
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तक़दीर मेरी मुझ सेे बग़ावत यूँँ कर गई जैसे गुलों पे ख़ुशबू ही इल्ज़ाम धर गई
Navneet krishna
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