ग़म-ज़दा गीत गुनगुनाना है हाल-ए-दिल आप को सुनाना है
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तुम अगर साथ देने का वा'दा करो मैं यूँँही मस्त नग़्में लुटाता रहूँ तुम मुझे देख कर मुस्कुराती रहो मैं तुम्हें देख कर गीत गाता रहूँ
Sahir Ludhianvi
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ढूँढ़ने चल राम को मैं मैं जगत सब घूम आया भागवत गीता मिली जब राम को मैं जान पाया
ATUL SINGH
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तेरी आँखों में एक दरिया है उस दरिया में मुझे बहने दो तेरे हृदय में एक कुटिया है उस कुटिया में मुझे रहने दो फिर जाने कितने ही शाइ'र मुझ को सुन कर इतरायेंगे मेरे गीतों में, मेरे छंदों में, मुझे तेरी ही गाथा कहने दो
Alankrat Srivastava
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ख़ाक बस्तियों में घर रेत के बनाओगे रोज़ रोज़ ऐसे ही ख़ूब चोट खाओगे सोचते तो हैं हम भी छत से कूद जाएँ अब फिर ख़याल आता है तुम कहाँ पे जाओगे जो हमारे हो कर भी हर किसी को देखोगे बे-वफ़ा की गिनती में यार आ ही जाओगे बे-नक़ाब होकर के हम निकल तो आएँगे हो गया कहीं कुछ भी हमपे टिन-टिनाओगे शब के आठ बजते ही तुम कहाँ पे जाते हो कोई पूछ बैठा फिर बोलो क्या बताओगे जब रक़ीब बनकर ही कुछ नहीं हुआ तुम सेे तुम हबीब बनकर क्या बस्तियाँ जलाओगे जब नज़र झुकाओगे बात बन ही जाएगी प्यार से जो बोलेंगे तुम भी मान जाओगे इश्क़ का मुहब्बत का जब बुख़ार आएगा वक़्त पर दवा लेना ख़ुद ही भूल जाओगे जब कभी भी तन्हाई नोच कर के खाएगी मेरा नाम लिख कर तुम हाथ पर मिटाओगे दास्ताँ मोहब्बत की एक बार सुन लोगे मेरा नाम गीतों में तुम भी गुन-गुनाओगे
Prashant Kumar
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वो जो गीत तुम ने सुना नहीं मेरी उम्र भर का रियाज़ था मेरे दर्द की थी वो दास्ताँ जिसे तुम हँसी में उड़ा गए
Amjad Islam Amjad
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इक इंक़लाब नया आज हो गया है क्या मुझे ज़माने ने ख़ुद ही बदल दिया है क्या
Navneet krishna
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यक़ीं किस तरह कोई उनपे करेगा वो खाते हैं झूठी क़सम देखते हैं नहीं जिस की ता'बीर कोई जहाँ में वही ख़्वाब हम ऐ सनम देखते हैं
Navneet krishna
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आप को अपना बनाना चाहता हूँ इक नई दुनिया बसाना चाहता हूँ आप को मैं आज़माना चाहता हूँ इक नया ये कारनामा चाहता हूँ
Navneet krishna
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हो गया मशहूर मैं दीवाना तेरे शहर में बन गया अफ़साने का अफ़साना तेरे शहर में
Navneet krishna
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मुझ को ये नज़र आया के वो एक बला है कुछ ख़्वाब है कुछ अस्ल है कुछ तर्ज -ए- अदा है वो ग़ैर की आग़ोश में रहने लगा शादाँ उस को नहीं मालूम के दिल मेरा जला है
Navneet krishna
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