इक इंक़लाब नया आज हो गया है क्या मुझे ज़माने ने ख़ुद ही बदल दिया है क्या
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ग़म-ज़दा गीत गुनगुनाना है हाल-ए-दिल आप को सुनाना है
Navneet krishna
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तक़दीर मेरी मुझ सेे बग़ावत यूँँ कर गई जैसे गुलों पे ख़ुशबू ही इल्ज़ाम धर गई
Navneet krishna
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आप को अपना बनाना चाहता हूँ इक नई दुनिया बसाना चाहता हूँ आप को मैं आज़माना चाहता हूँ इक नया ये कारनामा चाहता हूँ
Navneet krishna
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उस ने बुलवाया मुझे जाना पड़ा बे-सबब ही मुझ को मुस्काना पड़ा
Navneet krishna
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क्या थे क्या आज हो गए हैं हम याद-ए-जानाँ में खो गए हैं हम पेड़ पर फल ज़रूर आएगा प्यार के बीज बो गए हैं हम
Navneet krishna
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