मुझ को ये नज़र आया के वो एक बला है कुछ ख़्वाब है कुछ अस्ल है कुछ तर्ज -ए- अदा है वो ग़ैर की आग़ोश में रहने लगा शादाँ उस को नहीं मालूम के दिल मेरा जला है
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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इक इंक़लाब नया आज हो गया है क्या मुझे ज़माने ने ख़ुद ही बदल दिया है क्या
Navneet krishna
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ग़म-ज़दा गीत गुनगुनाना है हाल-ए-दिल आप को सुनाना है
Navneet krishna
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नज़र के सामने से फिर नया मंज़र गया है दिल लिए जम्बील हाथों में कहाँ दर-दर गया है दिल
Navneet krishna
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ठाट से चलोगे क्या ख़ाक में पलोगे क्या साथ हो हमेशा का दूर तक चलोगे क्या
Navneet krishna
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भला क्या कर गया है दिल जो ऐसे डर गया है दिल मिला क्या प्यार में इस को लहू से भर गया है दिल
Navneet krishna
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