ये काएनात मेरे सामने है मिस्ल-ए-बिसात कहीं जुनूँ में उलट दूँ न इस जहान को मैं
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर आदत इस की भी आदमी सी है
Gulzar
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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उस के पहलू से लग के चलते हैं हम कहीं टालने से टलते हैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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ये सोचना कि वो मुड़ मुड़ के देखती होगी और उस के बा'द ख़ुद अपने ख़याल पर हँसना
Akhtar Usman
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शाम आए और घर के लिए दिल मचल उठे शाम आए और दिल के लिए कोई घर न हो
Akhtar Usman
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मुद्दत में बहार आई है सो लोग भी ख़ुश हैं मैं ख़ुश हूँ अगर शहर में दो लोग भी ख़ुश हैं अपना तो ये आलम है कि ढलती ही नहीं शाम अल्लाह करें ख़ुश रहें जो लोग भी ख़ुश हैं
Akhtar Usman
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चेहरे पे साए में भी ख़राशें दिखाई दें आईना-ए-हयात पे इतनी नज़र न हो
Akhtar Usman
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