शाम आए और घर के लिए दिल मचल उठे शाम आए और दिल के लिए कोई घर न हो
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ये काएनात मेरे सामने है मिस्ल-ए-बिसात कहीं जुनूँ में उलट दूँ न इस जहान को मैं
Akhtar Usman
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ये सोचना कि वो मुड़ मुड़ के देखती होगी और उस के बा'द ख़ुद अपने ख़याल पर हँसना
Akhtar Usman
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मुद्दत में बहार आई है सो लोग भी ख़ुश हैं मैं ख़ुश हूँ अगर शहर में दो लोग भी ख़ुश हैं अपना तो ये आलम है कि ढलती ही नहीं शाम अल्लाह करें ख़ुश रहें जो लोग भी ख़ुश हैं
Akhtar Usman
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चेहरे पे साए में भी ख़राशें दिखाई दें आईना-ए-हयात पे इतनी नज़र न हो
Akhtar Usman
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