चेहरे पे साए में भी ख़राशें दिखाई दें आईना-ए-हयात पे इतनी नज़र न हो
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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ये सोचना कि वो मुड़ मुड़ के देखती होगी और उस के बा'द ख़ुद अपने ख़याल पर हँसना
Akhtar Usman
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ये काएनात मेरे सामने है मिस्ल-ए-बिसात कहीं जुनूँ में उलट दूँ न इस जहान को मैं
Akhtar Usman
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मुद्दत में बहार आई है सो लोग भी ख़ुश हैं मैं ख़ुश हूँ अगर शहर में दो लोग भी ख़ुश हैं अपना तो ये आलम है कि ढलती ही नहीं शाम अल्लाह करें ख़ुश रहें जो लोग भी ख़ुश हैं
Akhtar Usman
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शाम आए और घर के लिए दिल मचल उठे शाम आए और दिल के लिए कोई घर न हो
Akhtar Usman
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