ये कैसी सियासत है मिरे मुल्क पे हावी इंसान को इंसाँ से जुदा देख रहा हूँ
sherKuch Alfaaz
Sabir Dutt15 Likes
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वो हिंदू, मैं मुस्लिम, ये सिक्ख, वो ईसाई यार ये सब सियासत है चलो इश्क़ करें
Rahat Indori
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ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा
Munawwar Rana
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मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूब-सूरत है बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम मुझे पता चला वो कितनी ख़ूब-सूरत है
Bashir Badr
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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या
Anand Raj Singh
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चाँद सा मिस्रा अकेला है मिरे काग़ज़ पर छत पे आ जाओ मिरा शे'र मुकम्मल कर दो
Bashir Badr
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