ये मसअला नहीं है अब मुझ को क्या लगेगा जो चाहो बोल दो तुम मुझ को भला लगेगा लाखों शिकायतें हैं इस लहजे से तुम्हारे मैं ने बता दिया तो तुम को बुरा लगेगा
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सब को जोड़े से हम ने बिठाया मगर सब से आख़िर में हम ही खड़े रह गए
Amit Rajvanshi 'Guru'
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ये मुझ से बिछड़ना तो पहला क़दम था अभी तुम यहाँ और माहिर बनोगे
Amit Rajvanshi 'Guru'
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सब बताना पड़ रहा है दिल दुखाना पड़ रहा है मेरा दुख ये है कि मुझ को मुस्कुराना पड़ रहा है
Amit Rajvanshi 'Guru'
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यहाँ तो खेल सारा रौशनी का है यहाँ दीए के जलने से किसी को क्या
Amit Rajvanshi 'Guru'
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ख़्वाब को है ख़्वाब रहना सो भुलाना पड़ रहा है
Amit Rajvanshi 'Guru'
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