sherKuch Alfaaz

ये पता है नहीं कहाँ जाएँ अब जहाँ तू चला वहाँ जाएँ

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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम

Kumar Vishwas

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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है

Faiz Ahmad Faiz

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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा

Tehzeeb Hafi

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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है और वो मारने मरने पे उतर आता है

Tehzeeb Hafi

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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था

Tehzeeb Hafi

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