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ये पोखर सितमगर मुझे क्या करेगा निकल कर मैं आया हूँ बहती नदी से

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जब भी उस को बोलता हूँ प्यार का इज़हार कर बोलती है सब्र कर तू सब्र कर तू सब्र कर

Kanha Mohit

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सभी को बोझ लगता है मेरा होना ज़माने में अगर मैं बोझ बन जाऊँ मेरे पँखे के ऊपर तो

Kanha Mohit

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मेरे नज़दीक आई बा'द उस के और दो लड़की उदासी और तन्हाई मुझे पागल बना देंगी

Kanha Mohit

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सजदे करो लाखों मगर मालूम है ना इश्क़ है गर मिल गए तो ठीक वरना जानलेवा इश्क़ है संगम के पानी की तरह तुम सेे मेरा दिल मिल गया ये जान कर भी सोचती हो क्या भरोसा इश्क़ है पूछा किसी ने माँ से चुप कब से है तेरा लाडला कहने लगी जिस दिन मुझे इसने कहा था इश्क़ है मन्नत से शायद अपको जन्नत तो मिल भी सकती है पर वो मिलेगा जब उसे एहसास होगा इश्क़ है शिद्दत जुनूँ दीवानगी काफ़ी नहीं हैं इश्क़ में करना पड़ेगा सब्र 'मोहित' मोक्ष पाना इश्क़ है

Kanha Mohit

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मेरी आँखों ने दिल से बात छेड़ी हुई चर्चा तुम्हारी सादगी की

Kanha Mohit

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