ये रोज़ रोज़ मनाने से लाख अच्छा है ख़फ़ा हो हम सेे अगर तुम तो फिर ख़फ़ा ही रहो
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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तुम्हारे नाम की हर लड़की से मिला हूँ मैं तुम्हारा नाम फ़क़त तुम पे अच्छा लगता है
Unknown
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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उन की आँखें झील नहीं हैं आकाश इन्हें बत लाएँगे डूबने वाले डूब न पाए उड़ने वाले उड़ जाएँगे
Toyesh prakash
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क्या मुझे क्या तुझे चाहिए ज़िंदगी इस तरह गर चले मैं तुझे प्यार करता रहूँ तू मुझे प्यार करती रहे
Toyesh prakash
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जिन को सागर तक ये दरिया लगता है फिर अकेला सा किनारा लगता है
Toyesh prakash
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ये ज़िंदगी भी अजब से मुक़ाम लाती है भुला दिया था जिसे उस की याद आती है
Toyesh prakash
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याद पर हिचकियाँ गर आतीं हैं याद कर के तुम्हें सताएँगे
Toyesh prakash
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