ये सदमा जीते जी दिल से हमारे जा नहीं सकता उन्हें वो भूले बैठे हैं जो उन पर मरने वाले हैं
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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रोक ले ऐ ज़ब्त जो आँसू कि चश्म-ए-तर में है कुछ नहीं बिगड़ा अभी तक घर की दौलत घर में है
Ahsan Marahravi
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तमाम उम्र इसी रंज में तमाम हुई कभी ये तुम ने न पूछा तेरी ख़ुशी क्या है
Ahsan Marahravi
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किसी माशूक़ का आशिक़ से ख़फ़ा हो जाना रूह का जिस्म से गोया है जुदा हो जाना
Ahsan Marahravi
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मौत ही आप के बीमार की क़िस्मत में न थी वर्ना कब ज़हर का मुमकिन था दवा हो जाना
Ahsan Marahravi
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मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है ये ज़िंदगी की है सूरत तो ज़िंदगी क्या है
Ahsan Marahravi
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