ये सोच रात हो गई बता कहाँ मैं जाऊँगा जो शाख थी वो कट चुकी वो घर मेरा नहीं रहा
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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तेरी आँखों ने तो यहाँ कितने आशिक़ मार दिए
Rohit Raj
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तेरे जाते ही मेरे घर की घड़ियाँ उल्टा घूम जाती है
Rohit Raj
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शाम की उदासी में यादों का मेला हूँ भीड़ तो बहुत है मगर मैं अकेला हूँ
Rohit Raj
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राह पर चाँदनी बिछी होगी और परछाईं जल रही होगी पेड़ की छाल से रगड़ खा कर वो तने से फिसल रही होगी
Rohit Raj
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पहली बातों में ही तुम अच्छे लगे फिर तुम सेे मिलने की आदत हो गई
Rohit Raj
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