राह पर चाँदनी बिछी होगी और परछाईं जल रही होगी पेड़ की छाल से रगड़ खा कर वो तने से फिसल रही होगी
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निगाहें फेर ली घबरा के मैं ने वो तुम से ख़ूब-सूरत लग रही थी
Fahmi Badayuni
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ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
Jaun Elia
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आदमी देश छोड़े तो छोड़े 'अली' दिल में बसता हुआ घर नहीं छोड़ता एक मैं हूँ कि नींदें नहीं आ रही एक तू है कि बिस्तर नहीं छोड़ता
Ali Zaryoun
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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धूप पड़े उस पर तो तुम बादल बन जाना अब वो मिलने आए तो उस को घर ठहराना। तुम को दूर से देखते देखते गुज़र रही है मर जाना पर किसी गरीब के काम न आना।
Tehzeeb Hafi
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ये सोच रात हो गई बता कहाँ मैं जाऊँगा जो शाख थी वो कट चुकी वो घर मेरा नहीं रहा
Rohit Raj
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तेरे जाते ही मेरे घर की घड़ियाँ उल्टा घूम जाती है
Rohit Raj
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पहली बार देखा था तुझे फिर किसी को देखा ही नहीं
Rohit Raj
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ताश के इक्के के जैसा मेरा भी इश्क़ आख़िरी है
Rohit Raj
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तेरी आँखों की रौशनी से भी रोज़ कुछ लोग झूम उठते हैं
Rohit Raj
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