शाम की उदासी में यादों का मेला हूँ भीड़ तो बहुत है मगर मैं अकेला हूँ
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ये सोच रात हो गई बता कहाँ मैं जाऊँगा जो शाख थी वो कट चुकी वो घर मेरा नहीं रहा
Rohit Raj
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तेरी आँखों ने तो यहाँ कितने आशिक़ मार दिए
Rohit Raj
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तेरे जाते ही मेरे घर की घड़ियाँ उल्टा घूम जाती है
Rohit Raj
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पहली बार देखा था तुझे फिर किसी को देखा ही नहीं
Rohit Raj
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तेरी आँखों की रौशनी से भी रोज़ कुछ लोग झूम उठते हैं
Rohit Raj
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