ye thik hai nahin marta koi judai mein khuda kisi ko kisi se magar juda na kare
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सुन लिया कैसे ख़ुदा जाने ज़माने भर ने वो फ़साना जो कभी हम ने सुनाया भी नहीं
Qateel Shifai
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तेज़ धूप में आई ऐसी लहर सर्दी की मोम का हर इक पुतला बच गया पिघलने से
Qateel Shifai
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राब्ता लाख सही क़ाफ़िला-सालार के साथ हम को चलना है मगर वक़्त की रफ़्तार के साथ
Qateel Shifai
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सितम तो ये है कि वो भी न बन सका अपना क़ुबूल हम ने किए जिस के ग़म ख़ुशी की तरह कभी न सोचा था हम ने 'क़तील' उस के लिए करेगा हम पे सितम वो भी हर किसी की तरह
Qateel Shifai
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जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथ जाने क्यूँँ लोग मिरे नाम से जल जाते हैं
Qateel Shifai
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