काठ की हाँडी अब न चढ़ेगी ज़ुल्म के चूल्हे पर यारो वक़्त का पहिया घूमेगा मुंसिफ़ भी जेल में जाएगा
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हम को यारों ने याद भी न रखा 'जौन' यारों के यार थे हम तो
Jaun Elia
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सिर्फ़ ज़िंदा रहने को ज़िंदगी नहीं कहते कुछ ग़म-ए-मोहब्बत हो कुछ ग़म-ए-जहाँ यारो
Himayat Ali Shayar
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घर में ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है बताओ कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है
Adam Gondvi
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दुखे हुए लोगों की दुखती रग को छूना ठीक नहीं वक़्त नहीं पूछा करते हैं यारों वक़्त के मारों से
Vashu Pandey
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चारागरी की बात किसी और से करो अब हो गए हैं यारो पुराने मरीज़ हम
Shuja Khawar
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ज़िंदगी मेरी दे दो किसी और को अब न ताक़त है और हौसला भी नहीं
Amaan Pathan
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मैं कैसे हार मानूँ बिन लड़े ग़ुरबत के सहरा से अभी तो ग़म भुलाने हैं ख़ुशी का बीज बोना है
Amaan Pathan
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जो भी मिला वो रख लिया हम ने सहेज कर अब और क्या ही माँगते इस आशिक़ी से हम
Amaan Pathan
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तुम्हें उस्ताद से मिलेगा जो न मिलेगा ग़ज़ल की बाबत में
Amaan Pathan
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उस के बिन क्या है जनवरी यारो सर्द रातों में बस सिहरना है
Amaan Pathan
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