sherKuch Alfaaz

यूँँ तो बिछड़ने का वो ग़म था दर्द से भरा हुआ हम दूर भी चले गए और पीछे देखते रहे

More from Naviii dar b dar

वो अलग किरदार में दिखता है अब आदमी क्यूँ हार में दिखता है अब देख कर दुख होता है दिल को मेरे झूठ हर अख़बार में दिखता है अब

Naviii dar b dar

0 likes

वो अलग किरदार में दिखता है अब तो आदमी क्यूँ हार में दिखता है अब तो देख कर दुख होता है दिल को मेरे भी झूठ हर अख़बार में दिखता है अब तो

Naviii dar b dar

0 likes

पाने को इक हसीं ख़्वाब का वो नगर बस भटकता रहा यूँँ नवी दर-ब-दर

Naviii dar b dar

0 likes

यूँँ तो ज़माने में अच्छी भी तर्बियत रखते हैं कुछ रौशन हो के भी अंधेरे की अहमियत रखते हैं कुछ हैं जानते क़द्र इंसा की दिल से होती यहाँ पर बस इस लिए अब भी दिल में इंसानियत रखते हैं कुछ

Naviii dar b dar

0 likes

यूँँ तो ज़माने में अच्छी भी-तर्बियत रखते हैं कुछ रौशन हो के जो अंधेरे की अहमियत रखते हैं कुछ वो जानते क़द्र इंसा की-दिल से होती यहाँ पर बस इस लिए अब भी दिल में-इंसानियत रखते हैं कुछ

Naviii dar b dar

0 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Naviii dar b dar.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Naviii dar b dar's sher.