ज़माने से नहीं बनती मगर हाँ ख़ुदा से ख़ूब बनती है हमारी
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ज़माने वो नहीं हैं अब मुहब्बत देखते थे सब करेगी इश्क़ जो मुझ सेे मिरी तनख़्वाह देखेगी
Akash Rajpoot
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ज़ख़्म ये उन को भी दिखाना है जो समझते हैं सब फ़साना है
Akash Rajpoot
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दुनिया मतवाली हो जाए फूलों की डाली हो जाए तुम भी यदि मिलने आ जाओ अपनी दीवाली हो जाए
Akash Rajpoot
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यूँँ भी किसी की आस में बैठेंगे किसी दिन तन्हाइयों के पास में बैठेंगे किसी दिन दुनिया के फ़सादात से फ़ुर्सत मिले तो हम ऐ इश्क़, तिरी क्लास में बैठेंगे किसी दिन
Akash Rajpoot
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वो मुझ को छोड़ कर के क्या गया है सफ़र में नींद अब आने लगी है
Akash Rajpoot
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