ज़माना बड़े शौक़ से सुन रहा था हमीं सो गए दास्ताँ कहते कहते
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेे चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
Fahmi Badayuni
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मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है
Abrar Kashif
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बाग़बाँ ने आग दी जब आशियाने को मिरे जिन पे तकिया था वही पत्ते हवा देने लगे
Saqib lakhanavi
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बू-ए-गुल फूलों में रहती थी मगर रह न सकी मैं तो काँटों में रहा और परेशाँ न हुआ
Saqib lakhanavi
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मुट्ठियों में ख़ाक ले कर दोस्त आए वक़्त-ए-दफ़्न ज़िंदगी भर की मोहब्बत का सिला देने लगे
Saqib lakhanavi
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आधी से ज़ियादा शब-ए-ग़म काट चुका हूँ अब भी अगर आ जाओ तो ये रात बड़ी है
Saqib lakhanavi
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जिस शख़्स के जीते जी पूछा न गया 'साक़िब' उस शख़्स के मरने पर उट्ठे हैं क़लम कितने
Saqib lakhanavi
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