जमाना समझता हमारा विरह है बिछड़ के अलग हम हुए ही नहीं हैं
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जहाँ से जी न लगे तुम वहीं बिछड़ जाना मगर ख़ुदा के लिए बे-वफ़ाई न करना
Munawwar Rana
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मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
Allama Iqbal
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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ये जो सारा ज़माना मुझे चाहता एक तुम हो हमें जो नहीं चाहते
Kavi Naman bharat
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तड़प बस हमें तो तुम्हारी रही है तुम्हारे सिवा हम किसे और चाहें
Kavi Naman bharat
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वचन आपने जो निभाया नहीं था, इरादा हमें क्यूँ जताया नहीं था तुम्हारे हृदय के भवन में बहुत हैं, हमें ये कभी क्यूँ बताया नहीं था
Kavi Naman bharat
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सभी सोचते थे हमारा विरह है बिछड़ के अलग हम हुए ही नहीं थे
Kavi Naman bharat
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मुलाक़ात तुम सेे नहीं हो रही है, मुझे याद आती तुम्हारी निगाहें, यही बात हम को रुलाती रही है, नए साजना अब नईं और बाँहें
Kavi Naman bharat
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