सभी सोचते थे हमारा विरह है बिछड़ के अलग हम हुए ही नहीं थे
Related Sher
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
394 likes
जहाँ से जी न लगे तुम वहीं बिछड़ जाना मगर ख़ुदा के लिए बे-वफ़ाई न करना
Munawwar Rana
85 likes
मैं चाहता था मुझ सेे बिछड़ कर वो ख़ुश रहे लेकिन वो ख़ुश हुआ तो बड़ा दुख हुआ मुझे
Umair Najmi
99 likes
यार बिछड़ कर तुम ने हँसता बसता घर वीरान किया मुझ को भी आबाद न रक्खा अपना भी नुक़्सान किया
Ali Zaryoun
122 likes
More from Kavi Naman bharat
सुनी बात जग की,तो ऐसा हुआ फिर, जले जल में रघुवर,सिया के विरह में
Kavi Naman bharat
1 likes
जमाना समझता हमारा विरह है बिछड़ के अलग हम हुए ही नहीं हैं
Kavi Naman bharat
1 likes
ये जो सारा ज़माना मुझे चाहता एक तुम हो हमें जो नहीं चाहते
Kavi Naman bharat
1 likes
जो हुए हैं सृजित उन को ढहना ही है, तीर की खोज में सब को बहना ही है पीर सब को यहाँ होती जीवन में पर, रोज़ सहना यहाँ फिर भी रहना ही है
Kavi Naman bharat
1 likes
एक जीवन बनाने चले हम जहाँ राह में तो मरण से ही सजना पड़ा प्रेम पाने को जीवन बनाना जो था प्रेम पाने में पर प्रेम त्यजना पड़ा
Kavi Naman bharat
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Kavi Naman bharat.
Similar Moods
More moods that pair well with Kavi Naman bharat's sher.







