ज़िक्र ज़ात-ओ-सिफ़ात भी होगा कोई फिर कुल्लियात भी होगा
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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सच बताओं मर्सिया-ख़्वानी किसे मालूम है आँख से बहता हुआ पानी किसे मालूम है
Manohar Shimpi
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याज़ कोई भी रहे दीवानगी भी चाहिए मसअले हालात वर्ना आज भी प्रतिकूल हैं
Manohar Shimpi
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तुम वादियों को जन्नत-ए-कश्मीर ही कहते रहे फिर ख़ुशनुमा माहौल में ही लोग भी बसते रहे
Manohar Shimpi
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वक़्त आता और जाता है "मनोहर" फिर ग़म-ए-दिल और शिकवा क्यूँँ रहे है
Manohar Shimpi
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वहम करना अगर बुराई है तंज कसना कहाँ भलाई है
Manohar Shimpi
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