वक़्त आता और जाता है "मनोहर" फिर ग़म-ए-दिल और शिकवा क्यूँँ रहे है
Related Sher
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
162 likes
तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
339 likes
दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है
Zia Mazkoor
91 likes
हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
157 likes
More from Manohar Shimpi
सच बताओं मर्सिया-ख़्वानी किसे मालूम है आँख से बहता हुआ पानी किसे मालूम है
Manohar Shimpi
0 likes
कामयाबी से फली फूली मुहब्बत है तेरी हम सेफ़र के साथ दुनिया ख़ूब-सूरत है तेरी
Manohar Shimpi
0 likes
यक़ीं करो दस्तरस हमेशा हर एक को आज़मा रही है ज़मीं से फिर आसमाँ को छूने नया ही आलम बना रही है
Manohar Shimpi
1 likes
शरीक-ए-ज़िंदगी अच्छी रहे अरमान ही होता ग़म-ए-जानाँ सिवा जीना कहाँ आसान ही होता
Manohar Shimpi
1 likes
तुम वादियों को जन्नत-ए-कश्मीर ही कहते रहे फिर ख़ुशनुमा माहौल में ही लोग भी बसते रहे
Manohar Shimpi
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Manohar Shimpi.
Similar Moods
More moods that pair well with Manohar Shimpi's sher.







