शरीक-ए-ज़िंदगी अच्छी रहे अरमान ही होता ग़म-ए-जानाँ सिवा जीना कहाँ आसान ही होता
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ये मत भूलो कि ये लम्हात हम को बिछड़ने के लिए मिलवा रहे हैं
Jaun Elia
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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मोहब्बत अपनी क़िस्मत में नहीं है इबादत से गुज़ारा कर रहे है
Fahmi Badayuni
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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शजर आँगन में फूलों से महकता है परिंदों से वही हर दिन चहकता है
Manohar Shimpi
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फ़ैसला वो ग़लत था गवारा नहीं रोष हम ने गले से उतारा नहीं
Manohar Shimpi
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ये अजीब ही हैं अदावतें जो इसी सदी का शजर नहीं वो ही दाव अब्र सा जब चले है तो बादलों का भी डर नहीं
Manohar Shimpi
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ये दिल तेरी ज़ुल्फ़ों से गिरफ़्तार हुआ है ख़ामोश लबों से ही तो इज़हार हुआ है
Manohar Shimpi
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टूट जाए यक़ीन जब कोई क्यूँ करे इंतिजार तब कोई
Manohar Shimpi
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