ज़िन्दगी है आप और आप का ही है ख़याल लज़्ज़त-ए-हयात कितने चटपटे है दुनिया में
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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जो दुनिया को सुनाई दे उसे कहते हैं ख़ामोशी जो आँखों में दिखाई दे उसे तूफ़ान कहते हैं
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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जिस सेे ये तू ने लगाई फाँसी वो रस्सी किसी के झूले की थी
Abuzar kamaal
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साथ चलना पीछे से कीचड़ उड़ाना ये हुनर सीखा है क्या चप्पल से जानाँ
Abuzar kamaal
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लगाता हूँ जब तो गैरों से दिल लगाता हूँ मैं नहीं लगाता तो अपनो को मुँह नहीं लगाता
Abuzar kamaal
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मुलाक़ात है तो मुलाक़ात है मोहब्बत न समझो मुलाक़ात को
Abuzar kamaal
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नफरतें मुझ पर असर करती नहीं हैं, जान लो मैं ने सीखा है, मोहब्बत से मोहब्बत आएगी
Abuzar kamaal
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