ज़िन्दगी में रोज़ इम्तिहान है न जाने क्यूँँ कुछ करो या मत करो थकान है न जाने क्यूँँ पहले लोगों की तरह हमें न मिल सका सुकून चलते फिरते ज़ेहन में दुकान है न जाने क्यूँँ
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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ज़िन्दगी तुझ को न जी पाए हम वक़्त ने दर्द दिया जब इतना
Meem Alif Shaz
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ज़िन्दगी की उलझनें बूढ़ा न कर दे रात भर ये सोच कर सोते नहीं हम
Meem Alif Shaz
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ज़िन्दगी का बोझ ढ़ोते ढ़ोते कैसे हो गए उन सभी लोगों के चेहरे कितने पीले हो गए
Meem Alif Shaz
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ज़िंदगी तुझ को दिल से न चाहा मगर बन्दगी के लिए चाहना ही पड़ा
Meem Alif Shaz
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ये दुनिया जब फ़ानी है तो फिर तुम मस्जिद की तरफ़ ही दौड़ो ना
Meem Alif Shaz
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