ज़िन्दगी का बोझ ढ़ोते ढ़ोते कैसे हो गए उन सभी लोगों के चेहरे कितने पीले हो गए
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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इतना संगीन पाप कौन करे मेरे दुख पर विलाप कौन करे चेतना मर चुकी है लोगों की पाप पर पश्चाताप कौन करे
Azhar Iqbal
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हम को हमारी नींद भी वापस नहीं मिली लोगों को उन के ख़्वाब जगा कर दिए गए
Imran Aami
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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं
Ali Zaryoun
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे? तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
Kumar Vishwas
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ज़िन्दगी तुझ को न जी पाए हम वक़्त ने दर्द दिया जब इतना
Meem Alif Shaz
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ज़िंदा हो के रहना है मुझ को हमेशा तू मिरे दिल मैं हज़ारों ज़ख़्म देदे
Meem Alif Shaz
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ज़िन्दगी भी इक लतीफ़ा बन गई है हम छुपाते हैं ग़मों को मुस्कुरा के
Meem Alif Shaz
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ज़माने ने ग़लत को सच कहा है ज़माने की ख़राबी है हमीं से
Meem Alif Shaz
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ज़माने को ख़बर होती नहीं है ज़माना फिर भी सब कुछ जानता है
Meem Alif Shaz
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