हम को हमारी नींद भी वापस नहीं मिली लोगों को उन के ख़्वाब जगा कर दिए गए
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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ये मयकशों का तवाज़ुन भी क्या तवाज़ुन है खड़े भी रहना सहूलत से लड़खड़ाना भी हमारे शहर के लोगों को ख़ूब आता है किसी को सर पे बिठाना भी और गिराना भी
Imran Aami
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मैं चुप रहूँ तो मेरी आँख बोल पड़ती है चलो किसी को तो इज़हार करना आता है
Imran Aami
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ये अलग बात कि मैं छोड़ चुका कूज़ा-गरी तेरे जैसे तो मैं मिट्टी के बना सकता हूँ
Imran Aami
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तिरे बग़ैर भी हम जी रहे हैं और ख़ुश हैं ये बात कम तो नहीं है तुझे जलाने को
Imran Aami
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यही बहुत है मिरे ग़म में तुम शरीक हुए मैं हॅंस पड़ूँगा अगर तुम ने अब दिलासा दिया
Imran Aami
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