ये अलग बात कि मैं छोड़ चुका कूज़ा-गरी तेरे जैसे तो मैं मिट्टी के बना सकता हूँ
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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मैं चुप रहूँ तो मेरी आँख बोल पड़ती है चलो किसी को तो इज़हार करना आता है
Imran Aami
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ये मयकशों का तवाज़ुन भी क्या तवाज़ुन है खड़े भी रहना सहूलत से लड़खड़ाना भी हमारे शहर के लोगों को ख़ूब आता है किसी को सर पे बिठाना भी और गिराना भी
Imran Aami
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तिरे बग़ैर भी हम जी रहे हैं और ख़ुश हैं ये बात कम तो नहीं है तुझे जलाने को
Imran Aami
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हम को हमारी नींद भी वापस नहीं मिली लोगों को उन के ख़्वाब जगा कर दिए गए
Imran Aami
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यही बहुत है मिरे ग़म में तुम शरीक हुए मैं हॅंस पड़ूँगा अगर तुम ने अब दिलासा दिया
Imran Aami
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