तिरे बग़ैर भी हम जी रहे हैं और ख़ुश हैं ये बात कम तो नहीं है तुझे जलाने को
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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मैं चुप रहूँ तो मेरी आँख बोल पड़ती है चलो किसी को तो इज़हार करना आता है
Imran Aami
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ये मयकशों का तवाज़ुन भी क्या तवाज़ुन है खड़े भी रहना सहूलत से लड़खड़ाना भी हमारे शहर के लोगों को ख़ूब आता है किसी को सर पे बिठाना भी और गिराना भी
Imran Aami
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ये अलग बात कि मैं छोड़ चुका कूज़ा-गरी तेरे जैसे तो मैं मिट्टी के बना सकता हूँ
Imran Aami
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यही बहुत है मिरे ग़म में तुम शरीक हुए मैं हॅंस पड़ूँगा अगर तुम ने अब दिलासा दिया
Imran Aami
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हम को हमारी नींद भी वापस नहीं मिली लोगों को उन के ख़्वाब जगा कर दिए गए
Imran Aami
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