ज़माने ने ग़लत को सच कहा है ज़माने की ख़राबी है हमीं से
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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उस ने देखा मुझ को तो कुण्डी लगानी छोड़ दी फिर मिरे होंठों पे इक आधी कहानी छोड़ दी मैं छुपाए फिर रहा था इश्क़ अपने गाँव में और फिर ज़ालिम ने गर्दन पे निशानी छोड़ दी
nakul kumar
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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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मैं चूमता हूँ तो वो हाथ खींच लेता है उसे पता है ये सीढ़ी कहाँ पे जानी है
Nadir Ariz
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ये बहारें, ये सितारे, ये नज़ारे सब हँसी हैं गर तू मेरे साथ में है
Meem Alif Shaz
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ये रात भी है रात सी फिर भी लगे है डर हमें
Meem Alif Shaz
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ज़ख़्म मेरे ज़ख़्म जैसे तो नहीं हैं बेवफ़ाई के निशाँ हैं ज़ख़्म जैसे
Meem Alif Shaz
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ये सर्दी जान लेलेगी दिसंबर में ख़ुशामद कर के सूरज को बुलालो अब
Meem Alif Shaz
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याद आते ही दुश्मन है ये तो मिरा क़ब्र पर मेरी उस ने दुआँ की नहीं
Meem Alif Shaz
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