zindagi jin ke tasawwur se jila pati thi hae kya log the jo dam-e-ajal mein aae
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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हम हैं ना! ये जो मुझ सेे कहते हैं ख़ुद किसी और के भरोसे हैं ज़िंदगी के लिए बताओ कुछ ख़ुद-कुशी के तो सौ तरीक़े हैं
Vikram Gaur Vairagi
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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बस यूँँ ही दिल को तवक़्क़ो' सी है तुझ से वर्ना जानता हूँ कि मुक़द्दर है मेरा तन्हाई
Nasir Kazmi
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जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िन्दगी ने भर दिए तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
Nasir Kazmi
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दिन भर तो मैं दुनिया के धंदों में खोया रहा जब दीवारों से धूप ढली तुम याद आए
Nasir Kazmi
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मुझे ये डर है तेरी आरज़ू न मिट जाए बहुत दिनों से तबीअत मिरी उदास नहीं
Nasir Kazmi
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आरज़ू है कि तू यहाँ आए और फिर उम्र भर न जाए कहीं
Nasir Kazmi
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