aa jaae vo milne to mujhe id-mubarak mat aae ba-har-hal use id-mubarak aisa ho sab insan hon khush itne ki har roz ik dusre se kahta phire id-e-mubarak haan mujh se jise jis se mujhe jo bhi gila ho abad rahe shaad rahe id-e-mubarak tanhai si tanhai ki divar bhi shashdar ab khul ke kahe ya na kahe id-e-mubarak sargoshi ne patthar ko sabaq yaad dilaya paani ne likha aine pe id-e-mubarak tum jo mire sheron ke mukhatib the na hoge akhir men tumhen sirf tumhe id-mubarak aa jae wo milne to mujhe id-mubarak mat aae ba-har-haal use id-mubarak aisa ho sab insan hon khush itne ki har roz ek dusre se kahta phire id-e-mubarak han mujh se jise jis se mujhe jo bhi gila ho aabaad rahe shad rahe id-e-mubarak tanhai si tanhai ki diwar bhi shashdar ab khul ke kahe ya na kahe id-e-mubarak sargoshi ne patthar ko sabaq yaad dilaya pani ne likha aaine pe id-e-mubarak tum jo mere sheron ke mukhatib the na hoge aakhir mein tumhein sirf tumhe id-mubarak
Related Ghazal
ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे बना चुका हूँ मैं मोहब्बतों के दर्द की दवा अगर किसी को चाहिए तो मुझ सेे राब्ता करे
Tehzeeb Hafi
292 likes
इस तरह से न आज़माओ मुझे उस की तस्वीर मत दिखाओ मुझे ऐन मुमकिन है मैं पलट आऊँ उस की आवाज़ में बुलाओ मुझे मैं ने बोला था याद मत आना झूठ बोला था याद आओ मुझे
Ali Zaryoun
64 likes
वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को
Naseer Turabi
244 likes
मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा तू तो बीनाई है मेरी तेरे अलावा मुझे कुछ भी दिखता नहीं मैं ने तुझ को अगर तेरे घर पे उतारा तो मैं कैसे घर जाऊँगा चाहता हूँ तुम्हें और बहुत चाहता हूँ, तुम्हें ख़ुद भी मालूम है हाँ अगर मुझ सेे पूछा किसी ने तो मैं सीधा मुँह पर मुकर जाऊँगा तेरे दिल से तेरे शहर से तेरे घर से तेरी आँख से तेरे दर से तेरी गलियों से तेरे वतन से निकाला हुआ हूँ किधर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
241 likes
मुझे उदास कर गए हो ख़ुश रहो मिरे मिज़ाज पर गए हो ख़ुश रहो मिरे लिए न रुक सके तो क्या हुआ जहाँ कहीं ठहर गए हो ख़ुश रहो ख़ुशी हुई है आज तुम को देख कर बहुत निखर सँवर गए हो ख़ुश रहो उदास हो किसी की बे-वफ़ाई पर वफ़ा कहीं तो कर गए हो ख़ुश रहो गली में और लोग भी थे आश्ना हमें सलाम कर गए हो ख़ुश रहो तुम्हें तो मेरी दोस्ती पे नाज़ था इसी से अब मुकर गए हो ख़ुश रहो किसी की ज़िन्दगी बनो कि बंदगी मिरे लिए तो मर गए हो ख़ुश रहो
Fazil Jamili
73 likes
More from Idris Babar
तिरी गली से गुज़रने को सर झुकाए हुए फ़क़ीर हुजरा-ए-हफ़्त-आसमाँ उठाए हुए कोई दरख़्त सराए कि जिस में जा बैठें परिंदे अपनी परेशानियाँ भुलाए हुए मिरे सवाल वही टूट-फूट की ज़द में जवाब उन के वही हैं बने-बनाए हुए हमें जो देखते थे जिन को देखते थे हम वो ख़्वाब ख़ाक हुए और वो लोग साए हुए शिकारियों से मिरे एहतिजाज में 'बाबर' दरख़्त आज भी शामिल थे हाथ उठाए हुए
Idris Babar
1 likes
अब मसाफ़त में तो आराम नहीं आ सकता ये सितारा भी मिरे काम नहीं आ सकता ये मिरी सल्तनत-ए-ख़्वाब है आबाद रहो इस के अंदर कोई बहराम नहीं आ सकता जाने खिलते हुए फूलों को ख़बर है कि नहीं बाग़ में कोई सियह-फ़ाम नहीं आ सकता हर हवा-ख़्वाह ये कहता था कि महफ़ूज़ हूँ मैं बुझने वालों में मिरा नाम नहीं आ सकता मैं जिन्हें याद हूँ अब तक यही कहते होंगे शाहज़ादा कभी नाकाम नहीं आ सकता डर ही लगता है कि रस्ते में न रह जाऊँ कहीं कहलवा दीजिए में शाम नहीं आ सकता
Idris Babar
0 likes
एक दिन ख़्वाब-नगर जाना है और यूँँही ख़ाक-बसर जाना है उम्र भर की ये जो है बे-ख़्वाबी ये उसी ख़्वाब का हर्जाना है घर से किस वक़्त चले थे हम लोग ख़ैर अब कौन सा घर जाना है मौत की पहली अलामत साहिब यही एहसास का मर जाना है किसी तक़रीब-ए-जुदाई के बग़ैर ठीक है जाओ अगर जाना है शोर की धूल में गुम गलियों से दिल को चुप-चाप गुज़र जाना है
Idris Babar
2 likes
वो गुल वो ख़्वाब-शार भी नहीं रहा सो दिल ये ख़ाकसार भी नहीं रहा ये दिल तो उस के नाम का पड़ाव है जहाँ वो एक बार भी नहीं रहा पड़ा है ख़ुद से वास्ता और इस के ब'अद किसी का ए'तिबार भी नहीं रहा ये रंज अपनी अस्ल शक्ल में है दोस्त कि मैं इसे सँवार भी नहीं रहा ये वक़्त भी गुज़र नहीं रहा है और मैं ख़ुद इसे गुज़ार भी नहीं रहा
Idris Babar
0 likes
किसी के हाथ कहाँ ये ख़ज़ाना आता है मिरे अज़ीज़ को हर इक बहाना आता है ज़रा सा मिल के दिखाओ कि ऐसे मिलते हैं बहुत पता है तुम्हें छोड़ जाना आता है सितारे देख के जलते हैं आँखें मलते हैं इक आदमी लिए शम-ए-फ़साना आता है अभी जज़ीरे पे हम तुम नए नए तो हैं दोस्त डरो नहीं मुझे सब कुछ बनाना आता है यहाँ चराग़ से आगे चराग़ जलता नहीं फ़क़त घराने के पीछे घराना आता है ये बात चलती है सीना-ब-सीना चलती है वो साथ आता है शाना-ब-शाना आता है गुलाब सिनेमा से पहले चाँद बाग़ के बा'द उतर पड़ूँगा जहाँ कारख़ाना आता है ये कह के उस ने सेमेस्टर ब्रेक कर डाला सुना था आप को लिखना लिखाना आता है ज़माने हो गए दरिया तो कह गया था मुझे बस एक मौज को कर के रवाना आता है छलक न जाए मिरा रंज मेरी आँखों से तुम्हें तो अपनी ख़ुशी को छुपाना आना है वो रोज़ भर के ख़लाई जहाज़ उड़ाते फिरें हमें भी रज के तमस्ख़ुर उड़ाना आता है पचास मील है ख़ुश्की से बहरिया-टाउन बस एक घंटे में अच्छा ज़माना आता है ब्रेक-डांस सिखाया है नाव ने दिल को हवा का गीत समुंदर को गाना आता है मुझे डीफ़ैंस की लिंगवा-फ़्रांका नईं आती तुम्हें तो सद्र का क़ौमी तराना आता है मुझे तो ख़ैर ज़मीं की ज़बाँ नहीं आती तुम्हें मिर्रीख़ का क़ौमी तराना आता है
Idris Babar
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Idris Babar.
Similar Moods
More moods that pair well with Idris Babar's ghazal.







